Teacher Explains
✨ पुदुक्कोट्टई में साइकिल
आज हम 'जहां पहिया है' नामक एक कहानी के बारे में जानेंगे। यह कहानी तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले की है। क्या आप जानते हैं, वहां साइकिल चलाना एक बहुत बड़ा सामाजिक आंदोलन बन गया था? है न यह दिलचस्प बात?
✨ सामाजिक आंदोलन
पुदुक्कोट्टई की हजारों महिलाओं के लिए साइकिल चलाना एक साधारण बात से बढ़कर था। साइकिल उनके लिए पिछड़ेपन से लड़ने, अपना विरोध जताने और उन बंधनों को तोड़ने का एक तरीका बन गया था, जिनमें वे बंधी हुई थीं। उन्होंने साइकिल को अपनी आजादी का प्रतीक बना लिया था।
✨ महिलाओं की आज़ादी
पुदुक्कोट्टई भारत के सबसे गरीब जिलों में से एक है। यहां, गांव की महिलाओं ने अपनी आजादी और खुलकर घूमने-फिरने की इच्छा को दिखाने के लिए साइकिल को चुना। उनमें से बहुत सी महिलाएं हाल ही में पढ़ना-लिखना सीखी थीं। दस साल से कम उम्र की बच्चियों को छोड़ दें, तो गांव की लगभग एक-चौथाई महिलाओं ने साइकिल चलाना सीख लिया था। 70,000 से भी ज़्यादा महिलाओं ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपने इस नए कौशल का प्रदर्शन किया!